Tuesday, 14 January 2025

POI क्या है?

 POI क्या है?


POI एक ऐसी अवस्था है जिसमें अंडाशय पर्याप्त मात्रा में एस्ट्रोजन का उत्पादन नहीं कर पातीं, जिससे मासिक धर्म अनियमित हो जाता है या पूरी तरह बंद हो जाता है। यह समस्या हार्मोनल असंतुलन और अंडोत्सर्जन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करती है।


POI के लक्षण:



POI के लक्षण PCOS से कुछ मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन इसमें विशिष्ट लक्षण शामिल हैं:
  1. अनियमित या अनुपस्थित मासिक धर्म
  2. गर्म फ्लैश और रात में पसीना
  3. योनि में सूखापन
  4. मूड स्विंग्स और अवसाद
  5. थकान और ऊर्जा की कमी
  6. गर्भधारण में कठिनाई

POI के कारण:

POI के संभावित कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • जेनेटिक कारक: X क्रोमोसोम की असामान्यताएं।
  • ऑटोइम्यून डिसऑर्डर: शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अंडाशय पर हमला करती है।
  • कैंसर उपचार: कीमोथेरपी या रेडिएशन थेरेपी से अंडाशय को नुकसान हो सकता है।
  • पर्यावरणीय कारक: विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना।

POI का उपचार:

POI का स्थायी इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को प्रबंधित किया जा सकता है।
  1. हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT): शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन की कमी को पूरा करना।
  2. फर्टिलिटी उपचार: गर्भधारण के लिए IVF या डोनर एग का उपयोग।
  3. आहार और जीवनशैली में सुधार:
    • हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन D युक्त आहार लें।
    • नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन।

निष्कर्ष:

POI महिलाओं की प्रजनन क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। समय पर निदान और सही उपचार से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह का पालन करना POI से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है।


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डॉ. भूषण काळे                                                                                 डॉ .स्मिता काळे 

  एम एस (प्रसूती व स्त्री रोग )                                                                  एम डी (पंचकर्म ) केरळ

                       आयुभूषण आयुर्वेदिक वंध्यत्व निवारण आणि केरळीय पंचकर्म चिकित्सालय

                             (वंध्यत्व, स्त्रीरोग, गर्भसंस्कार, सुवर्णप्राशन, केरळीय पंचकर्म)

                                                       9665351355 / 8888511522


PCOD… एक अपूर्ण प्रकल्प

 PCOD… एक अपूर्ण प्रकल्प

स्त्रीची प्रजनन संस्था ही खूप गुंतागुंतीने काम करणारी व्यवस्था आहे. याला एका मल्टिनॅशनल कंपनीशी तुलना करता येईल, जिथे प्रत्येक विभाग आपापले कार्य सुरळीत पार पाडतो.

या कंपनीचा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर म्हणजे मेंदूचा हायपोथॅलॅमस विभाग. हा विभाग आपल्या सीईओ म्हणजेच पिट्युटरी ग्रंथीच्या माध्यमातून ओव्हरी या कार्यालयाचे काम चालवतो.




पिट्युटरी ग्रंथी दर महिन्याला ओव्हरीला एक ओव्हम तयार करण्याचे आदेश देते. महिन्याच्या सुरुवातीला एफएसएच (FSH) या प्रोजेक्ट मॅनेजरला ओव्हरी ऑफिसमध्ये पाठवले जाते.

ओव्हरीतील प्रक्रिया


ओव्हरीमध्ये असणारी हजारो ओसाइट्स (Oocytes) म्हणजे या कंपनीचे इंटर्न्स, काम शिकण्यासाठी प्रयत्न करतात. एफएसएच या मॅनेजरच्या मदतीने यापैकी 20 ओसाइट्स विकसित होतात. त्यातला एक ओसाइट योग्य प्रशिक्षण घेऊन एलएच (LH) या दुसऱ्या प्रोजेक्ट मॅनेजरच्या मार्गदर्शनाखाली ओव्हम म्हणून ओव्हरीतून बाहेर येतो.
यानंतर ओव्हम गर्भाशयात जाऊन पुरुष बीजाची (स्पर्म) वाट पाहतो. जर बीजाशी यशस्वी संयोग झाला तर गर्भधारणा होते; अन्यथा महिन्याच्या शेवटी ओव्हम शरीरातून बाहेर टाकला जातो.

PCOD कसे होते?



सध्याच्या बदललेल्या जीवनशैलीमुळे, जसे की वजन वाढणे, चुकीच्या आहारपद्धती, मानसिक ताण आणि व्यायामाचा अभाव, प्रजनन संस्थेचा हा प्रकल्प वारंवार फसतो. परिणामी, ओव्हम ओव्हरीच्या बाहेर पडत नाही. महिनेच्या महिन्यांपर्यंत ओव्हम ओव्हरीमध्येच अडकून राहतो आणि ओव्हरी द्राक्षाच्या घडासारखी दिसू लागते. यालाच PCOD (Polycystic Ovarian Disease) असे म्हणतात.


PCOD ची लक्षणे



1. मासिक पाळी अनियमित किंवा कमी होणे.

2. चेहऱ्यावर अनावश्यक लव वाढणे.

3. केस गळणे.

4. पिंपल्स वाढणे.

5. वजन वाढणे.

6. वंध्यत्वाचा त्रास.

PCOD होण्याची कारणे



· अधिक बैठे काम व व्यायामाचा अभाव.

        · अति स्निग्ध व गुरू पदार्थांचा (पिझ्झा, बटर, पनीर, लस्सी, मांसाहार) अतिवापर.

· लवकर वयात कामोत्तेजक गोष्टींचा अति संपर्क (स्पर्श, दृश्य किंवा श्राव्य माध्यमातून).

· पाळी पुढे-मागे करण्यासाठी घेतल्या जाणाऱ्या हार्मोनल गोळ्या.

· अति रुक्ष आहार, जसे की डाएटच्या नावाखाली उपाशी राहणे.

· मानसिक ताण आणि चिंता.

या सर्व कारणांमुळे मेंदूतील हार्मोन्सचे संतुलन बिघडते, ज्याचा परिणाम दर महिन्याला ओव्हरीतून बाहेर पडणाऱ्या ओव्हमवर होतो. हा अडथळा सातत्याने होत राहिल्यास PCOD निर्माण होतो.


आयुर्वेदाद्वारे PCOD उपचार

PCOD हा आयुर्वेदाने पूर्णपणे बरा होणारा विकार आहे. परंतु, यासाठी खालील उपचारांची अंमलबजावणी आवश्यक आहे:

1. पंचकर्म:

वमन  बस्ती अशा पंचकर्म प्रक्रियेद्वारे शरीरशुद्धी केली जाते.

यानंतर औषधोपचार करून PCOD पूर्णपणे बरा केला जातो.

2. आहार:

रुग्णाला योग्य आहारसंबंधी मार्गदर्शन केले जाते. काही विशिष्ट पदार्थांचा योग्य वापर करण्यास सांगितले जाते.

3. योगासने:

पवनमुक्तासन, शलभासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, चक्कीचालनासन, तितलीआसन, पश्चिमोत्तानासन यांसारखी आसने नियमित केल्यास PCOD पुन्हा होण्याची शक्यता कमी होते.


निष्कर्ष

PCOD झालेल्या स्त्रियांच्या ओव्हम ट्रेनिंगचा प्रकल्प आयुर्वेदाने सुरळीत पार पाडता येतो. परंतु, यासाठी नियमित पथ्य, पंचकर्म आणि औषधोपचार यांचे पालन करणे गरजेचे आहे. आयुर्वेदातील योग्य उपचार पद्धतीने PCOD पूर्णपणे बरा करता येतो आणि महिलांचे प्रजनन आरोग्य सुधारता येते.



 डॉ. भूषण काळे                                                                                 डॉ .स्मिता काळे 

  एम एस (प्रसूती व स्त्री रोग )                                                                  एम डी (पंचकर्म ) केरळ

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Thursday, 9 January 2025

महिला बांझपन - पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)

 

महिला बांझपन का परिचय

महिला बांझपन आज के समय में एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जो पूरी दुनिया में लाखों महिलाओं को प्रभावित कर रही है। इस लेख श्रृंखला का उद्देश्य महिला प्रजनन तंत्र से जुड़ी उन चुनौतियों को विस्तार से समझाना है, जो बांझपन का कारण बनती हैं।

इस श्रृंखला के माध्यम से हम प्रजनन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का विश्लेषण करेंगे, जिससे विभिन्न समस्याओं और उनके संभावित समाधान पर प्रकाश डाला जा सके। हमारा लक्ष्य है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों और बांझपन के संभावित कारणों को समझकर सही कदम उठाएं।

अगले लेख में, हम अंडाशय और ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करेंगे।

 

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS): हार्मोनल असंतुलन और इसका प्रभाव



परिचय:

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में होने वाली एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या है। यह एक हार्मोनल विकार है जो महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है। भारत में, हर 10 में से 1 महिला PCOS से ग्रसित है। इस लेख में, हम PCOS के कारण, लक्षण, और उपचार पर चर्चा करेंगे।


PCOS क्या है?

PCOS एक ऐसी स्थिति है जिसमें अंडाशय (ओवरी) में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं। यह समस्या हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है, जिससे अंडोत्सर्जन (Ovulation) प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इस स्थिति में शरीर में एंड्रोजन नामक पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे महिलाओं को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


PCOS के लक्षण:



PCOS के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्यतः इसमें निम्नलिखित लक्षण शामिल होते हैं:

  1. अनियमित मासिक धर्म: पीरियड्स का देर से आना या न आना।
  2. वजन बढ़ना: विशेष रूप से पेट के क्षेत्र में चर्बी का जमाव।
  3. मुंहासे: हार्मोनल असंतुलन के कारण त्वचा पर पिंपल्स।
  4. अनचाहे बाल: चेहरे, छाती या पीठ पर अधिक बाल उगना।
  5. बाल झड़ना: सिर के बाल पतले होना या झड़ना।
  6. थकान और अवसाद: ऊर्जा की कमी और मानसिक तनाव।

PCOS के कारण:

PCOS के कारणों का पूरी तरह से पता नहीं है, लेकिन कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • जेनेटिक फैक्टर: यदि परिवार में किसी को PCOS है, तो इसका खतरा अधिक होता है।
  • इंसुलिन प्रतिरोध: शरीर में इंसुलिन की मात्रा अधिक होने से एंड्रोजन का स्तर बढ़ सकता है।
  • जीवनशैली: अस्वस्थ खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी।

PCOS के स्वास्थ्य पर प्रभाव:

PCOS का महिलाओं के स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। यह न केवल प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि इससे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।


PCOS का उपचार:

PCOS का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

  1. आहार और जीवनशैली में बदलाव:
    • कम कार्बोहाइड्रेट और उच्च प्रोटीन युक्त आहार लें।
    • रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
  2. योग और प्राणायाम:
    • योग और ध्यान तनाव को कम करने में मदद करते हैं।
    • भस्त्रिका, अनुलोम-विलोम, और कपालभाति जैसे प्राणायाम PCOS में लाभकारी हैं।
  3. औषधियां और चिकित्सा:
    • डॉक्टर की सलाह से हार्मोनल थेरपी या अन्य दवाइयां लें।
  4. आयुर्वेदिक उपचार:
    • अशोक चूर्ण, शतावरी, और त्रिफला जैसे आयुर्वेदिक नुस्खे PCOS में सहायक हो सकते हैं।

निष्कर्ष:

PCOS एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन सही उपचार और जीवनशैली में बदलाव से इसे प्रबंधित किया जा सकता है। यदि आपको PCOS के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप PCOS के प्रभाव को कम कर सकती हैं और एक स्वस्थ जीवन जी सकती हैं।


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 डॉ. भूषण काळे                                                                                 डॉ .स्मिता काळे 

  एम एस (प्रसूती व स्त्री रोग )                                                                  एम डी (पंचकर्म ) केरळ

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